Rajistan 2 Friend friendship story: ये वो कहानी है जो सबको आश्चर्य में दाल देंगी! लगता है जैसे कोई मूवी हो! जिसने भी इन दोस्तों में मिलान को देखा वो दंग रह गया! ये चित्तौरगढ़ के बैंक ऑफ बड़ौदा की ब्रांच में शनिवार को ऐसा ही नजारा पेश हुआ! हैरान भरी बात यह रही बैंक का मैनेजर ऑटो ड्राइवर के गले मिल रहा था!

Rajistan 2 Friend Friendship Story –

दोनों की आँखों में जैसे ख़ुशी की लहर दौड़ गयी हो! क्योकि ये कोई और नहीं बल्कि बचपन के दोस्त है! बच्चपन में साथ-साथ खेलना कूदना एक साथ ही था परन्तु अब काम धंधे वाले ये लोग एक मैनेजर और एक ऑटो ड्राइवर, पर दिल दोस्ती थी जोकि किसी की गुलाम नहीं!

दो दोस्तों की कहानी थी कुछ ऐसी

अब से चालीस साल पहले अनुज के पिता कन्हैयालाल पोरवाल शहर के सैनिक स्कूल में अध्यापक थे! और उसी स्कूल में पीर मोहम्मद के पिता फतेह मोहम्मद इलेक्ट्रिशयन थे! दोनों परिवारों में अपनों जैसा प्रेम प्यार था! एक दूसरे साथ सुख-दुःख में खड़े रहते, घर में आना जाना लगा रहता! अनुज के पिता ईद जैसे त्यौहार पर पीर मोहम्मद के घर जाकर सिवइयों का सेवन करते! और पीर के पिता दिवाली अनुज के पिता के घर मनाते! अछनाक से एक दिन पीर मोह्हमद के पिता को दिल का दौरा पड़ा और कुछ समय में वो गुजर गए!

उनके निधन के बाद उनकी पत्नी को स्कूल में काम मिल गया! फिर समय बिता और अनुज के पिता कन्हैयालाल का भी ट्रांसफर हो गया! इसके बाद वि लोग राजिस्तान के ही उदयपुर में रहने लगे! फिर थोड़ी दूरियां बढ़ी और आना जाना बंद हो गया! और इस तरह से दोनों परिवारों में संपर्क खत्म हो गया! अब अनुज सेंती में बैंक ऑफ बड़ौदा के शाखा प्रबंधक हैं! और पीर मोह्हमद चित्तोड़ में ऑटो चालते है! हाल ही में शनिवार को अनुज ने पीर को देख और अपने गले से लगा लिया! जिनका प्यार उनकी आँखों से झलकने लगा! अनुज ने अपनी माँ से भी पीर की बात कराई! और बोले आज भी मोह्हमद परिवार की बाते अक्सर घर में होती रहती है!

चित्तोड़ से जाने के बाद पोरवाल तलाश रहे पीर मोह्हमद को

अनुज पहले यहां बीओबी सेंती में ब्रांच मैनेजर बनकर आएं तो उन्होंने बैंक के एक ग्राहक अकरम अली से पीर मोहम्मद के परिवार की चर्चा की! अकरम ने पीर को ढूढ़ने का ब्यौरा उठाया! जैसा की फतेह मोह्हमद का निधन चालीस वर्ष पहले हो चूका था! इसलिए वे लोग फतेह के परिवार की तलाश ना कर पाए! एक दिन सैनिक स्कूल से रिटायर कर्मचारी देवीलाल से अकरम का मिलना हुआ! वहां से पता चाला कि मोह्हमद परिवार शहर में कस्बा चौकी के पास रहता हैं! उसी वक़्त अकरम वहां गए और पीर को अनुज के बारे बताया! इसके बाद अकरम ही पीर की बैंक लेकर आये!