BJP Alliance Break Punjab Strategy: लगता है कि BJP के सितारे गर्दिश में जाने वाले हैं. एक एक कर सभी सहयोगी हाथ छोड़ते जा रहे हैं. आंध्र प्रदेश (AP) की तेलुगुदेशम पार्टी और महाराष्ट्र की Shivsena के बाद अब पंजाब, हरियाणा और दिल्ली की सहयोगी शिरोमणि अकाली दल ने BJP को छोड़ कर अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है.

BJP Alliance Break Punjab Strategy-

अकाली दल के इस एकतरफा फैसले ने BJP को सकते में डाल दिया है. फिलहाल यह Alliance सिर्फ हरियाणा के लिए टूटा है, लेकिन यह BJP के लिए बड़ा झटका है. Haryana के प्रत्येक लोकसभा क्षेत्र में सिक्ख और पंजाबी आबादी निर्णायक संख्या है. दोनों राज्यों की सीमाएं सटी हुई है और दोनों की Capital भी एक हीं है.

1. हरियाणा (Haryana) में अकेले उतरेंगें मैदान में

पंजाब के पूर्व Deputy CM और शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने साफ कर दिया है कि हम हरियाणा में BJP के साथ अपने सभी संबंधों को समाप्त करते हैं और आगामी Loksabha Election में अपने बूते अकेले सभी सीटों पर चुनाव लड़ेंगें.

इसी कड़ी में Kurukshetra में 19 अगस्त को रैली रखी गई है जिसमें बड़ी संख्या में पंजाबी एवं सिक्ख समुदाय के लोग हिस्सा लेंगें. बादल ने रैली को सफल बनाने के लिए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की पूर्व प्रधान बीबी जागीर कौर, Delhi सिक्ख गुरुद्वारा प्रबंधक Committee के प्रधान मंजीत सिंह जीके, सांसद प्रेम सिंह चंदूमाजरा, परमिंदर सिंह ढींडसा जैसे बड़े सिक्ख नेताओं की टीम बना दी है.

2. RSS की वजह से सिक्खों में नफरत

Punjab की सत्ता से बेदखल होने के बाद से शिरोमणि अकाली दल छअपटाहट में है. दरअसल सिक्ख समुदाय की नई पीढ़ी BJP से नहीं बल्कि RSS से नफरत की हद तक नफरत करती है. सिक्ख नौजवानों को लगता है कि RSS उनके सिक्खी स्वरुप को खत्म करना चाहती है. RSS सिक्ख धर्म को अलग धर्म मानने की बजाए केशधारी हिंदू बताती है. यहीं से विवाद शुरु होता है.

3. सिक्खों का समर्थन Congress को

यही कारण है कि युवा सिक्ख मतदाताओं को Congress बनने में कोई ऐतराज नहीं है बल्कि BJP और RSS से उन्होंने दूरी बना ली है. नशे का मुद्दा तो Punjab का सबसे बड़ा मुद्दा था लेकिन RSS को लेकर सिक्ख समुदाय की सोच की वजह से भी अकाली BJP की हार हुई औैर CONG को शानदार जीत मिली.

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बड़ी संख्या में सिक्ख नौजवान आज CONG से जुड़ कर सक्रिय राजनीति में हैं. Operation Blue Star और 1984 दंगों जैसे मुद्दों को पीछे छोड़ कर पंजाबी समुदाय अपने Future की ओर देख रहा है. वो अपने खालसा पंथ के भविष्य की ओर देख रहा है जहां उसे कोई खतरा नहीं दिख रहा.

निष्कर्ष :

अकाली नेतृत्व भी इस सच को देख रहा है और समझ रहा है. कभी पंजाब पर एकछत्र राज्य करने वाला अकाली दल आज वहां 3rd नंबर की Party बन गया है. प्रधान सुखबीर सिंह बादल इस बात को समझते हैं कि अगर BJP से पिंड नहीं छुड़ाया गया तो उनकी Party का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा. धीरे धीरे हीं सहीं शिरोमणि अकाली दल अब BJP और RSS से अलग रास्ते पर चलना चाहता है.

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